'अमरीका-ब्रिटेन सहयोग दुनिया के लिए अहम'

प्रधानमंत्री बनने के बाद डेविड कैमरन की ये पहली अमरीका यात्रा है.

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के साथ मुलाक़ात के बाद अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है ब्रिटेन के साथ उनके देश का रिश्ता “सही मायने में विशिष्ट” है.

उन्होंने कहा कि जब अमरीका और ब्रिटेन मिलकर काम करते हैं तो दुनिया “ज़्यादा सुरक्षित और ज़्यादा संपन्न” रहती है.

ब्रिटेन का प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद डेविड कैमरन की ये पहली अमरीका यात्रा है.

तीन घंटों से ज़्यादा चली बैठक में दोनों नेताओं ने अफ़गानिस्तान, मध्यपूर्व, ईरान, अर्थव्यवस्था और मेक्सिको की खाड़ी में तेल रिसाव जैसे गंभीर विषयों पर बात की.

कैमरन ने कहा कि दोनों देशों के बीच रिश्ता “आवश्यक” है.

उन्होंने कहा कि दोनों ही नेता दुनिया की बड़ी चुनौतियों को हल करने के लिए एक सी सोच रखते हैं.

ब्रिटिश पेट्रोलियम

मेक्सिको की खाड़ी तेल के रिसाव के लिए ज़िम्मेदार ब्रितानी कंपनी ब्रिटिश पेट्रोलियम या बीपी दोनों ही नेताओं की बैठक का एक अहम हिस्सा बनी.

कैमरन ने जहां तेल रिसाव को एक आपदा का नाम दिया वहीं ये भी कहा कि ये दोनों देशों के हित में है कि ये कंपनी सफल हो.

ब्रिटेन में लॉकरबी विमान विस्फोट के दोषी को रिहा कर दिए जाने से अमरीका में ख़ासी नाराज़गी है. उस विस्फोट में मारे गए ज़्यादातर लोग अमरीकी नागरिक थे.

बराक ओबामा बीपी के ख़िलाफ़ काफ़ी कड़े शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं.

लेकिन तेल रिसाव से भी ज़्यादा बीपी के ख़िलाफ़ अमरीका में कड़वाहट पैदा हुई है 1988 में हुए पैनएम विमान विस्फोट के दोषी, एक लीबीयाई नागरिक, की रिहाई में बीपी की कथित भूमिका को लेकर.

स्कॉटलैंड के लॉकरबी शहर के ऊपर हुए इस विमान दुर्घटना में 250 से ज़्यादा लोग मारे गए थे और उसमें ज़्यादा तादाद अमरीकियों की थी.

लेकिन विमान में बम विस्फोट के लिए ज़िम्मेदार माने जाने वाले व्यक्ति को पिछले साल अगस्त में स्कॉटलैंड की एक अदालत ने रिहा कर दिया.

अमरीका में इसकी ख़ासी आलोचना हुई और अमरीकी कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीपी ने उसकी रिहाई के लिए दबाव डाला क्योंकि उसे लीबिया में व्यापार करना था.

इस बम विस्फोट में लीबिया का हाथ माना गया है.

अमरीकी कांग्रेस कह रही है कि ये कंपनी लोगों से ज़्यादा अपने फ़ायदे का ध्यान रखती है.

इस मामले पर डेविड कैमरन ने कहा कि विस्फोट के दोषी को रिहा किया जाना एक ग़लत फ़ैसला था लेकिन इसमें बीपी की कोई भूमिका नहीं थी.

उन्होंने कहा कि वो इस मामले की जांच कर रहे चार अमरीकी सेनेटरों से भी मिलने को तैयार हैं.

बीपी की ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में खासी अहमियत है.

 

 

आतंकवाद को अलग-अलग खाँचों में न डालें: कृष्णा

अफ़ग़ानिस्तान सम्मेलन में हिस्सा लेने काबुल आए भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सुनिश्चित करना होगा कि आतंकवाद को अलग-अलग खाँचों में डालकर न देखा जाए.

उनका कहना था कि आतंकवाद से निपटने में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई की बात का हवाला देते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद सबका साझा दुश्मन है.

अफ़ग़ानिस्तान पर काबुल में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस बात पर सहमति जताई गई है कि विकास कार्यों के लिए दिए जाने वाली राशि का 50 फ़ीसदी हिस्सा सीधे अफ़ग़ान सरकार के ज़रिए दिया जाएगा.

फ़िहलाल केवल 20 फ़ीसदी सहायता राशि सरकार के ज़रिए जाती है. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई काफ़ी समय से कोशिश कर रहे थे कि ये हिस्सा बढ़ाया जाए.

सम्मेलन के समापन पर हामिद करज़ई ने कहा है कि सभी प्रतिनिधियों ने सुशासन और विकास के प्रति वचनबद्धता जताई है ताकि मेलमिलाप और शांति कायम की जा सके.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के साथ संयुक्त पत्रकार वार्ता में अफ़ग़ान राष्ट्रपति ने कहा कि वो चाहते हैं कि अफ़ग़ान सैनिक 2014 आते-आते देश की सुरक्षा स्वयं करने लगें.

उन्होंने माना कि अफ़ग़ानिस्तान अभी तक लोगों को बेहतर शासन देने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया है.लेकिन भ्रष्टाचार के लिए उन्होंने विदेशी सुरक्षा कंपनियों को ज़िम्मेदार ठहराया.

हामिद करज़ई ने कहा कि अफ़गानिस्तान और उसे समर्थन दे रहे देशों के समक्ष एक ख़तरनाक दुश्मन है हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर तालिबान का नाम नहीं लिया.

इस सम्मेलन में अफ़गानिस्तान में भ्रष्टाचार, सुरक्षा, विकास और प्रशासन के मुद्दों पर चर्चा हुई जिसमें भारत और पाकिस्तान समेत 70 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

अमरीका ने कहा 2011 है समयसीमा

राष्ट्रपति ओबामा चाहते हैं कि हालात के जायज़े के बाद जुलाई 2011 तक अफ़ग़ान सुरक्षाकर्मियों को ज़िम्मा सौंप दिया जाए. ये समयसीमा दर्शाती है कि अमरीका इस ओर कितना गंभीर है

हिलेरी क्लिंटन

सम्मेलन में हिस्सा लेने आईं अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि अफ़ग़ान सरकार कई चुनौतियों से निपटने की कोशिश तो कर रही है लेकिन अभी काफ़ी काम किया जान बाकी है.

हिलेरी का कहना था, “राष्ट्रपति ओबामा चाहते हैं कि हालात के जायज़े के बाद जुलाई 2011 तक अफ़ग़ान सुरक्षाकर्मियों को ज़िम्मा सौंप दिया जाए. ये समयसीमा दर्शाती है कि अमरीका इस ओर कितना गंभीर है.”

इस मौके पर ब्रितानी विदेश मंत्री विलियम हेग ने कहा कि अफ़ग़ान सुरक्षाकर्मियों को ज़िम्मेदारी सौंपने का काम उनकी क्षमता को देखकर करना होगा लेकिन ये जल्द शुरु हो जाना चाहिए.

वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने अपने भाषण में कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य पर ये सबसे ठोस दृष्टि है.

जबकि नैटो के महासचिव का कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान में जारी अभियान एक ज़रूरत है न कि वैकल्पिक. उन्होंने कहा कि जब तक वहाँ काम ख़त्म नहीं हो जाता तब तक सैनिक वहाँ रहेंगे.

टीकाकारों का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के ज़्यादातर हिस्सों में अब भी विद्रोही सक्रिय है और इसे देखकर कहा जा सकता है कि सुरक्षा ज़िम्मेदारी को लेकर करज़ई का लक्ष्य बहुत महत्वाकांक्षी है.

तालिबान कहता रहा है कि जब तक विदेशी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद हैं तब तक वो लड़ता रहेगा.