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सनसनी के नाम पर सच्चाई से खिलवाड़ : इन दिनों न्यूज़ चैनलों पर असली के नाम पर नकली और मिलावट की ख़बरें खूब चल रहीं है. कहीं असली दूध के नाम पर नकली सिंथेटिक दूध मिल रहा है तो कहीं बड़ी ब्रांडेड कंपनियों की बोतल में नकली कोल्ड ड्रिंक और इन सब का भंडाफोड़ कर रहे है न्यूज़ चैनल. आपको पता चले कि तमाम न्यूज़ चैनल और उनके स्ट्रिंगर भी असली खबर के नाम पर नकली का धंधा कर रहे हैं तो आप के पैरों तले ज़मीन सरक जाएगी. आप सोचेंगे किस पर यकीन करें और किस पर ना करें. जी हां, ये सच्ची कहानी हम आपके लिए लाये हैं खास इलाहाबाद से. आप ने टीवी पर देखा होगा उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद की ख़बरें लखनऊ को भी पीछे छोड़ रही हैं. रोज़ किसी न किसी बड़े राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल पर इलाहाबाद की कोई न कोई खबर सनसनी पैदा कर रही है. अगर आप गौर फरमाए तो सोचेंगे की इलाहाबाद जहां किसी राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल का बंदा नियुक्त नहीं है, सब स्ट्रिंगर हैं, वहां से ऐसी ख़बरें... अब इन ख़बरों की सच्चाई भी जान लीजिये...मैं सिर्फ पिछले कुछ दिनों इन चैनलों पर दिखीं ख़बरों का जिक्र करने जा रहा हूं.
स्टोरी नंबर एक... इलाहाबाद के थरवई थाने में पड़ने वाले शीतलपुर गांव में 3 जुलाई को ज़मीन के विवाद में गांव के दबंगों ने, लल्ली देवी नाम की एक दलित महिला का वो घर गिरा दिया, जिसको लेकर विवाद था. इस दौरान दबंगों ने लल्ली देवी के परिवार वालों की पिटाई भी की. जब लल्ली देवी बीच में आईं तो उन्हें भी मारा-पीटा और घसीटा गया. लल्ली देवी ने बताया कि उसे घसीटने के दौरान उसके कपड़े अस्त-व्यस्त हो गए थे, लेकिन शाम को ये खबर एक न्यूज़ चैनल पर "राष्ट्रीय शर्म" के नाम से प्रसारित की गई. मुद्दा बनाया गया मायावती के राज में एक दलित महिला को दबंगों ने निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घुमाया. उस चैनल पर चीरहरण का ग्राफिक्स भी बनाया गया. रात तक हालत ये हो गयी कि इस खबर से पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए. शहर के स्टार रिपोर्टर ने उनकी पतलून ढीली कर दी थी.
रात में आनन-फानन में डीआईजी महोदय ने प्रेस कांफ्रेंस कर सफाई दी. उन्होंने कहा कि ये बात सरासर झूठ है. खुद लल्ली देवी ने भी निर्वस्त्र घुमाये जाने का जिक्र किसी से नहीं किया, न तो चैनल के दर्जन से ज्यादा माइक के सामने न पुलिस के सामने. फिर ये खबर कैसे और कहां से आ गयी? हालांकि पुलिस ने बाकी घटना को स्वीकार किया. इस मामले कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया. हमारे पास भी उस महिला की रिकार्डेड बाइट है. हम बताते हैं आपको, एक-एक अक्षर उसी महिला की जुबान में कि उसने दर्जनों पत्रकारों के सामने क्या कहा..."साहब जब हमका घेर्राए के मारे लगेन, सब सर पे बटुर गया..सब सर पे चढ़ गया..पूरी एकदम जैसे घेर्राए लगेन..सारी धोती तो सब सर पे चढ़ गया".
जाहिर है जैसा लल्ली देवी ने खुद बताया, उनके साथ मार-पीट के दौरान उनके कपड़े अस्त-व्यस्त हुए थे, लेकिन... नंगा कर गाँव में घुमाना अलग और बेहद संगीन मामला है. खैर, फर्जीवाडा करने वाले चैनल की टीआरपी आसमान पर थी और उसके स्ट्रिंगर का दिमाग सातवें आसमान पर, लेकिन अगर सच माने तो राष्ट्रीय शर्म यहाँ किसके लिए है, सरकार के लिए या न्यूज़ चैनल के लिए. जिसने सारे समाज के सामने टीवी पर दलित महिला का चीरहरण किया. हम ये मानने को भी तैयार नहीं हैं कि ये केवल स्ट्रिंगर का दिमाग की उपज था. आखिर पीड़ित महिला की बाइट भी तो किसी भी सूरत में "राष्ट्रीय शर्म" की खबर को सपोर्ट नहीं कर रही थी..
स्टोरी नम्बर दो...17-18 अगस्त को जी न्यूज़ पर एक खबर धड़ल्ले से चल रही थी. इलाहाबाद में चाइना शराब का धंधा शबाब पर. हजारों की जान मुश्किल में. होमियोपैथी की दुकान पर बिक रही है "चाइना शराब." दवा की बिक्री का आलम ये है की इसने देशी और विदेशी शराब को भी पीछे छोड़ दिया है. उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग की नींद उड़ गयी है. सरकार ने विभाग से एक हफ्ते में जवाब मांगा है ..वगैरह-वगैरह. पर इसकी असली कहानी दुसरी थी. पूरा मामला दरअसल होमियोपैथी की एक दवा "टोन एंड प्लस" से जुड़ा हुआ है, जिसकी 200 एमएल की बोतल 35-40 रुपये में मिलती है. इस दवा में जिसमे 35 से 40 प्रतिशत तक अल्कोहल की मात्रा होती है.
ये सच है कि इस तरह का मामला उत्तर प्रदेश के कुछ दूसरे जिलों में सामने आया था, लेकिन वो न तो इतना बड़ा मामला था और ना उसमें इलाहाबाद का कहीं नाम-पता था. खबर के दौरान दिखाई गयी तस्वीरें भी फर्जी थी. इन तस्वीरों में कुछ लोग देशी पौव्वा पी रहे थे...हालांकि होमियोपैथी की दवा की कुछ दुकानों के दृश्य असली थे. अब इन दुकानों के मालिक उस स्ट्रिंगर को तलाश कर रहे हैं, जिसने झूठ बोलकर उनकी दुकानों की तस्वीरें उतार ली थी. ये लोग कोर्ट जाने की तैयारी भी कर रहे हैं. इस खबर की सच्चाई आबकारी विभाग से पूछने पर पता चल सकती है. अधिकारियों ने इलाहाबाद में इस तरह के किसी भी मामले से इनकार कर दिया.
स्टोरी नंबर तीन...इलाहाबाद में हफ्ता भर पहले एक खबर ज्यादातर न्यूज़ चैनलों पर सुर्खियाँ बटोर रही थी... खबर थी इलाहाबाद में "हंटर वालों का खौफ." मामला इलाके के बहरिया क्षेत्र से जुड़ा था. छेड़खानी के झगड़े में गामा यादव नाम के एक शख्स की पिटाई दो मोटरसाइकिल सवारों ने कर दी. यह खबर एक हिंदी दैनिक ने छापी. फिर क्या था न्यूज़ चैनल वालों का दिमाग चलने लगा. स्ट्रिंगरों की एक टोली इलाके में पहुंच गई. उनके साथ था तांगा हांकने वाला एक हंटर और अपनी पत्नियों की लिपिस्टिक. भाइयों ने अखबार के स्थानीय सूत्र के माध्यम से एक दर्जन लोगो को इकट्ठा किया. इसके बाद शुरू हो गया ड्रामा. कुछ गांव वालों के शरीर पर लिपिस्टिक से हंटर के निशान बनाये गए. उनकी बाइट ली गयी.
उसके बाद क्या था, दूसरे दिन से न्यूज़ चैनलों पर हंटर वालों के खौफ दिखाई पड़ने लगा. इलाहाबाद के बाज़ार सूने पड़ गए. लोग रात को घर से निकलने में कतराने लगे. कुछ चैनलों ने पीड़ितों को लाइव किया. कुछ ने नाट्य रूपांतरण तक करा डाला. इस मामले को बहन जी की मानिटरिंग कमेटी की टीम ने संज्ञान ले लिया. फिर क्या था लखनऊ शासन से इलाहाबाद की अधिकारियों के फ़ोन घनघनाने लगे. एक बार फिर खाकी वालों की घिग्घी बंध गयी. आनन-फानन में रात को प्रेस कांफ्रेंस बुलाई गई. एसपी महोदय चिंतित थे. उन्होंने प्रेस कांफेंस में खुलकर कहा कि मामला पूरी तरह फर्जी है. उन्होंने हंटर की चोट खाए एक शख्स को मोबाइल से कॉल किया. मोबाइल को स्पीकर मोड पर लिया और पूछा- बताओ तुमको हंटर किसने मारा? सच बताओं और सच नहीं बोलोगे तो तुम्हारी चमड़ी खींच लूंगा. फ़ोन पर मौजूद शख्स घबरा गया उसने कहा- साहब कुछ चैनल वाले आये थे और रंग लगाकर हमारी फोटो खींचकर ले गए हम और कुछ नहीं जानते.
प्रेस कांफेंस के दौरान वो स्ट्रिंगर भी मौजूद थे, जिन्होंने इस कहानी का फर्जीवाडा किया था. उन्होंने तुरंत एक सब-इंस्पेक्टर का हवाला दिया कि उसने बाइट दी है. उसने कहा है कि वो मामले की जांच करेंगे और हंटर वालों से रक्षा के लिए कमेटी भी बनायेंगे. अब एसपी साहब ने उस सब-इंस्पेक्टर से स्पीकर ऑन कर मोबाइल मिलाया, जो रिटायर होने वाला था. सिपाही से भर्ती होकर उम्र के आखिरी पड़ाव पर वो बड़ी मुश्किल से सब-इंस्पेक्टर बना था, टीवी पर आने की उसकी दबी ख्वाहिश ने उसका बेड़ा गर्क कर दिया. एस.पी. साहब ने पूछा कि तुमने मीडिया को क्या बताया है....सब इंस्पेक्टर की जबान लड़खड़ाने लगी. उसने कहा साहब कुछ मीडिया वाले आये थे और हमसे जो बोलने को कहा हमने बोल दिया, बड़ी गलती हो गयी. खैर, मामला आया गया हो गया.
पहले तो एसपी साहब मीडियावालों पर कार्रवाई की बात कर रहे थे लेकिन कुछ दिन बाद ठंडे पड़ गए. एसपी साहब जानते हैं कि पुलिस सौ गलत काम रोज़ करती है और मीडिया से दुश्मनी अच्छी नहीं. पर हम इतना जरुर कहेंगे कि इन सब मामलों में केवल स्ट्रिंगर ही दोषी नहीं हैं. दोष उनके चैनल के न्यूज़ एडिटर और प्रोडूसर का भी है जो साफ़-साफ़ फर्जी दिखने वाली ख़बरों को भी बड़ी खबर बना देते हैं, कमबख्त टीआरपी के लिए. शायद यही सोचते होंगे कि ऐसी मीडिया ही देश में क्रांति लाएगी. एक ज़माना था जब टीवी चैनल वालों की ज़माने में बड़ी इज्जत थी, लेकिन आज इज्जत तो दूर की बात, वो गली-मोहल्ले और चौराहों पर बेभाव पिट रहे है. आप ऐसी तस्वीरें भी आप टीवी पर ही देख सकते हैं.
: एक पत्रकार का दर्द : इसके लिये वो महिला को नग्न करता था : बदमाश मुझ पर भूखे भेडि़यों की तरह टूट पड़े : इस बार मुझसे इस्तीफा ले लिया गया : मीडिया जब भी अपना मुंह खोलता है या अपनी कलम से बोलता है तो अपने लिए नहीं बल्कि इस गूंगे-बहरे समाज के लिए. एक मीडियाकर्मी के लिए ख़बर की चाहत जुनून के किस हद तक होती है, इस सवाल का जवाब पत्रकार बंधु अच्छी तरह जानते हैं. समाज का दर्द हम देख नहीं सकते और अपने दर्द में कभी उफ तक करना हमें मंजूर नहीं होता. कुछ दर्द ऐसा भी होता है जो बदलते समय के साथ और गहरा होता जाता है. और कई बार यही दर्द जेहन से निकल कर कागज के पन्नों पर उतर आता है. और फिर पन्ना कभी कभी बहुत सीख दे जाता है. मैंने भी इन पन्नों से बहुत कुछ सीखा है. इन्हीं यादों का झरोखा आज मैं खोलने को मजबूर हुआ हूं.