: दिल्ली में बोले चिदंबरम- घाटी की हालत ठीक नहीं : कश्मीर में मीडिया बुरी स्थिति में है. हिंसा और तनाव के बीच मीडिया पर पाबंदी लगाने का दौर जारी है. जो मीडिया हाउस सरकार के प्रवक्ता के रूप में काम नहीं कर रहे हैं, दोनों पक्षों की बातों को रखने की कोशिश कर रहे हैं, आंदोलनकारियों का भी पक्ष रख रहे हैं, उन पर सरकारी गाज गिरा दी जा रही है.
ताजी सूचना के मुताबिक जम्मू-कश्मीर सरकार ने फिर दो लोकल न्यूज चैनलों के प्रसारण पर रोक लगा दिया है. अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन ने श्रीनगर के एसपी को एसईएन चैनल और एसईएन आवाज के प्रसारण पर रोक लगाने का निर्देश दिया है. इन दोनों चैनलों पर केबल टीवी नेटवर्क कानून 1995 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है. सरकार का इस बारे में कहना है कि ये दोनों टीवी चैनल भड़काऊ कार्यक्रम दिखा रहे थे. अलगाववादियों की गतिविधियों की विस्तृत रिपोर्ट प्रसारित कर रहे थे. इस प्रसारण के कारण ला एंड आर्डर की स्थिति लगातार बिगड़ रही है.
उधर, दिल्ली में गृह मंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि कश्मीर घाटी में हालात ठीक नहीं है. वहां सब कुछ सामान्य नहीं है. उनका कहना है कि कश्मीर में अशांति के पीछे कुछ पार्टियों व संगठनों की भूमिका संभव है. लगातार बंद के कारण घाटी में जनजीवन अस्तव्यस्त है.
जितने चाहे उतने चैनल खोलो
अपलिंकिंग - डाउनलिंकिंग की मंजूरी की फीस बढ़ाने और इसे हर साल वसूलने को कहा है. अपलिंकिंग - डाउनलिंकिंग की इजाजत की अवधि दस वर्षों के लिए एक समान रहेगी. 'ट्रांसफर ऑफ परमीशन' की इजाजत न मिलेगी. न्यूज - करंट अफेयर्स चैनलों के लिए आवेदन करने वाली कंपनी के किसी एक व्यक्ति को प्रतिष्ठित मीडिया कंपनी में वरिष्ठ मैनेजमेंट पद पर 10 वर्षों का अनुभव होना चाहिए. अन्य चैनलों के मामले में अनुभव की यह सीमा पांच वर्ष की हो सकती है.
ट्राई ने कहा कि टीवी चैनलों के अपलिंकिंग/डाउनलिंकिंग के लिए इजाजत करने वाले आवेदन पर जल्द विचार कर तीन महीने में फैसला कर लिया जाए. इसके लिए सूचना-प्रसारण मंत्रालय में सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम बनाना होगा. ट्राई ने देश में टीवी चैनलों की संख्या पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इस निर्णय ने रोक ज्यादा चैनल हो जाने और स्पेक्ट्रम कम होने के कारण नए चैनलों की मंजूरी न मिलने की पूर्व की स्थिति को खत्म कर दिया है.
कुछ महीनों पहले मंत्रालय ने भारत में अपलिंकिंग-डाउनलिंकिंग की इजाजत के लिए नए आवेदन सस्पेंड कर दिया था. ट्राई ने साफ कह दिया है कि चैनलों की कुल संख्या पर कोई बंदिश लगाने का कोई मतलब नहीं है. हां, चैनलों के रजिस्ट्रेशन के लिए पैरामीटर्स को बदला जा सकता है.
शो में प्रतिभागियों को गर्भवती होने का अहसास और प्रसव महसूस भी करने पड़े : 'मीठी छूरी' जैसे शो में किस बात का मुकाबला होगा : नाच गाकर बड़े हुए तो स्वयंवर रचाया, शादी की, गर्भवती हुए और बच्चे जने। अब उब गए ऐसी जिंदगी से तो कुछ इतर संबंध बनाने की जुगत चली है। और इसीलिए ‘मीठी छूरी’ दिल पे कटार चलाने आने वाली है। जी हां, यह कोई कहानी नहीं बल्कि ‘रियल्टी’ है और पिछले कुछेक वर्षों में हमारे मनोरंजक मीडिया चैनलों के ‘सभ्यतापूर्वक विकास’ की कहानी भी। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाली 'मेरी आवाज सुनो' जैसी प्रतियोगिता से सुनिधि चैहान जैसी गायिका देश को मिली, फिर इसके बाद तो ऐसे शो प्रसारित करने की होड़ लग गई। इसके कई अच्छे परिणाम देखने को भी मिले। इसके बाद श्रेया घोषाल... आदि अनेक अच्छी प्रतिभाओं की खोज हुई। रियल्टी शोज से ना सिर्फ गाने की बल्कि नृत्य, कामेडी, प्रतिभा खोज, खतरों के खिलाड़ी जैसे ढेरों रियल्टी शो के माध्यम से देश के दूर दराज क्षेत्रों तक से विभिन्न तरह की प्रतिभाओं को पहचाना जा सका। वे सामने आए और उन्हें उचित पहचान मिली। डर को जीतने वालों को भी पहचाना जा सका। कई शो की सफलताओं से प्रेरित, पिछले कुछेक वर्षों में रियल्टी शो की बाढ़ विभिन्न चैनलों पर आ गई। इसमें बिग बॉस, इमोशनल अत्याचार, खतरों के खिलाड़ी, स्वयंवर, देसी गर्ल, मुझे इस जंगल से बचाओ, पति पत्नी और वो, आदि आदि रहे। वैसे तो कई रियल्टी शो को आलोचना का शिकार होना पड़ा है, पर कुछ ऐसे रहे जिसने यह प्रश्न पुरजोर तरीके से उठाया कि आखिर क्या खोज रही हैं ये प्रतियोगिताएं और क्या परोसा जा रहा है यहां ? कभी वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोषी जी ने व्यंग्य से कहा था कि स्वयंवर दिखाया है, तो अब प्रसव भी दिखाओ! और हुआ यही। स्वयंवर के बाद पति पत्नी और वो में प्रतिभागियों को गर्भवती होने का अहसास और प्रसव महसूस भी करने पड़े। आखिर क्या सीखा ? किस बात की प्रतिस्पर्धा, कैसा मुकाबला है यह सब ?और अब आ रहा है मीठी छूरी न.-1, 'कौन चुरा सकती है आपका ब्याय फ्रेंड' प्रश्न वाले प्रोमो के साथ। यानी मुकाबला होगा दूसरे का साथी चुराने का। क्या खूब! प्रोमो में प्रतिभागी स्वयं यह कहती सुनाई देती है कि इस शो में हिस्सा लेने के बाद सचमुच मेरी शादी नहीं होगी। धारावाहिकों/फिल्मों में दिखाये जाने वाले विवाहेत्तर संबंध अब रियल्टी शो बन रहे हैं। हालांकि मीडिया/धारावाहिक/फिल्म समाज के दर्पण माने जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो समाज में घटता है- वही यहां दिखता है। लेकिन क्या ऐसा सचमुच हो रहा है ? क्या हमारे समाज की यह वास्तविकता है या संस्कार! या फिर मीडिया ऐसे संस्कार परोस कर समाज पर यह सब थोप रहा है? यह एक बड़ा सवाल है। 'मीठी छूरी' जैसे शो में किस बात का मुकाबला होगा ? ऐसे गलत संस्कारों का ? जो सामाजिक रूप से ही नहीं बल्कि वैधानिक रूप से भी गलत है। तो क्या आने वाले दिनों में हमें चोरी, लूट-पाट, डकैती, दुष्कर्म आदि के मुकाबले भी देखने को मिलेंगें ? मेरे यह लाइन लिखने के पहले ही कहीं प्रोड्यूसरों को कोई ऐसा विचार न मिल गया हो! नए शो बनाने का। भगवान ना करे! लेखिका लीना मीडिया मोर्चा की संपादक हैं मैनेजर मार्केटिंग (महिला) : पद- 1 : मीडिया हाउस में छह से आठ साल तक सेल्स एंड मार्केटिंग मैनेजर पद का अनुभव/ डीएवीपी और एड ऐजेंसीज में अच्छे संपर्क/ मार्केटिंग की रणनीति और टारगेट अचीव करने की क्षमता/क्लाइंट्स से बेहतर संबंध/ एमबीए या अन्य प्रोफेशनल कोर्स की डिग्री या डिप्लोमा, माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड और एक्सल पर काम करने की आदत एक्जीक्यूटिव्स मार्केटिंग (महिला/पुरुष) : पद- 10 : मीडिया मार्केटिंग में दो साल का अनुभव/ क्लाइंट्स से बेहतर संबंध/ एमबीए, माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड और एक्सल पर काम करने की आदत सीनियर एकाउंटेंट : पद- 1 : मीडिया हाउस में जनरल एकाउंटिंग के अलावा, इनकम टैक्स, वैल्यू एडेड टैक्स सर्विस टैक्स, ईपीएफ और ईएसआई एकाउंट्स हैंडलिंग का चार से छह साल का अनुभव, कम से कम बी.काम. एकाउंटेंट : पद- 4 : मीडिया हाउस में जनरल एकाउंटिंग/ टैली की बेहतर जानकारी, दो साल का अनुभव, कम से कम बी.काम. मैनेजर डिस्ट्रीब्यूशन : पद- 1 : दिल्ली और एनसीआर में न्यूज चैनल डिस्ट्रीब्यूशन का चार से छह साल का अनुभव। टीआरपी-जीआरपी रणनीति/ टैम-ट्राई में संपर्क और कम से कम स्नातक एक्जीक्यूटिव्स डिस्ट्रीब्यूशन : पद- 4 : दिल्ली और एनसीआर में न्यूज चैनल डिस्ट्रब्यूशन का दो से चार साल का अनुभव। कम से कम स्नातक, माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड और एक्सल पर काम करने की आदत मैनेजर-पीआर (महिला) : पद- 1 : प्रजेनटेबुल, पीआर में मास कम्युनिकेशन की डिग्री, हिंदी-अंग्रेजी (के साथ तीसरी भाषा) में बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, मीडिया, पॉलिटिकल और बिजनेस हाउसेस और ब्यूरोक्रेट्स से अच्छे संपर्क, माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड और एक्सल पर काम करने की आदत एक्जीक्यूटिव्स-पीआर (महिला) : पद- 1 : प्रजेनटेबुल, पीआर में मास कम्युनिकेशन की डिग्री, हिंदी-अंग्रेजी में बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, मीडिया, पॉलिटिकल और बिजनेस हाउसेस और ब्यूरोक्रेट्स से अच्छे संपर्क, माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड और एक्सल पर काम करने की आदत सेक्रेटरी (महिला) : पद- 3 : हिंदी-अंग्रेजी की अच्छी जानकारी के साथ बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, सेक्रेट्रीयल प्रैक्ट्रिस की डिग्री या डिप्लोमा, मीडिया बैक ग्राउंड, माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड और एक्सल पर काम करने की आदत गेस्ट को-ऑर्डिनेटर (महिला/पुरुष) : पद- 2 : हिंदी-अंग्रेजी लिखने-बोलने की अच्छी जानकारी के साथ गुड कम्युनिकेशन स्किल, मीडिया, पॉलिटिकल और बिजनेस हाउसेस और ब्यूरोक्रेट्स से अच्छे संपर्क माइक्रोसॉफ्ट वर्ल्ड और एक्सल पर काम करने की आदत रिसेप्शनिस्ट : पद- 3 : मीडिया हाउस के क्रिया कलापों की जानकारी, अतिथि सत्तकार में निपुणता, प्रजेनटेबुल, हिंदी-अंग्रेजी की अच्छी जानकारी के साथ बेहतर कम्युनिकेशन स्किल, एक्सल, वर्ल्ड पर काम करने की आदत रिकॉर्ड कीपर : पद- 1 : मीडिया हाउस के आंतरिक कार्यों,रिकॉर्ट फाइलिंग का अनुभव, एक्सल, वर्ल्ड पर काम करने की आदत स्टोर कीपर : पद- 1 : मीडिया हाउस के विभिन्न विभागों में उपयोग होने वाली वस्तुओं, उपकरणों और मशीनों की जानकारी, सभी की इंवेटरी बनाने औप सहेजने का अनुभव, एक्सल, वर्ल्ड पर काम करने की आदत एक्जीक्यूटिव्स-एचआर (महिला/पुरुष) : पद- 3 : एचआर मैनेजमेंट, बिजनैस एडमिनिस्ट्रेशन में डिग्री या समकक्ष, किसी मीडिया संस्थान में दो साल का अनुभव, टाइम ऑफिस एंप्लाइज वैलफयेर के साथ एचआर के नियम-कायदों की अच्छी जानकारी, एक्सल, वर्ल्ड पर काम करने की आदत ऑडियो-वीडियो टेक्नीशियन : पद- 2 : एमसीए/सीसीएनए और किसी न्यूज चैनल के आडियो-वीडियो सिस्टम पर दो साल का अनुभव आईटी सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर : पद- 1 : एमसीए/सीसीएनए और किसी न्यूज चैनल के (ऑटोमेशन) फोक-ऑक्टोपस, आडियो-वीडियो का कम से कम दो साल का अनुभव ग्राफिक्स डिजायनर : पद- 1 : फोटो शॉप, थ्री डी मैक्स, कोरल ड्रा, मया, फ्लैश, आफ्टर इफैक्ट की जानकारी के साथ मीडिया हाउस में काम करने का अनुभव और कम से कम ग्रेजुएशन के साथ मल्टीमीडिया में डिप्लोमा/ डिग्री ड्राइवर : पद- 10 : रॉल्स रॉयस और मर्सडीज जैसी कारों के लिए तीन, ओबी वैन के लिए तीन और मारूति ईको वैन के लिए चार ड्राइवरों की जरूरत, अच्छे पढ़े-लिखे अंग्रेजी समझने और बोलने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता सहायक चतुर्थ श्रेणी : पद- 1 : 10+2 के साथ न्यूज चैनल के वातावरण में काम करने की आदत (राजीव शर्मा, सक्षम प्राधिकारी, एस-वन न्यूज चैनल, नोएडा की तरफ से जारी प्रेस नोट)
दो अगस्त की रात आइबीएन-सेवेन ने झारखंड के छह विधायकों का स्टिंग आपरेशन दिखाया। यह स्टिंग आपरेशन कोबरा पोस्ट के दिल्ली स्थित संवाददाता आशीष ने किया। उन्होंने कोबरा पोस्ट के संपादक अनिरूद्ध बहल के निर्देशन पर रांची में रहकर यह दुस्साहसिक काम किया। इस पूरी प्रक्रिया में आइबीएन-सेवेन की टीम का कोई सदस्य किसी भी रूप में जुड़ा नहीं था। कोबरा पोस्ट ने स्टिंग करने के बाद अपने फुटेज आइबीएन-सेवेन को बेच दिये। दिलचस्प यह कि आइबीएन सेवेन पर यह खबर चलने के बाद इसकी क्रेडिट इस चैनल के रांची सिथत एक संवाददाता जयशंकर को दी जाने लगी। जयशंकर ने भी मौके का लाभ उठाकर बयान दे डाला कि किस तरह उन्होंने रात-रात भर जगकर यह स्टिंग आपरेशन किया। प्रभात खबर ने तो उसका लंबा सा इंटरव्यू ही प्रकाशित कर दिया। जबकि आइबीएन-सेवेन और कोबरा पोस्ट से जुड़े लोग यह समझ नहीं पा रहे कि यह गलतफहमी से हुआ या जानबूझकर कि दूसरे के काम की क्रेडिट लेने की कोशिश की जा रही है। दिल्ली से एक वरीय पत्रकार ने भड़ास4मीडिया को यह जानकारी दी है। साथ ही यह सुझाव दिया है कि इस मामले का खुलासा स्वयं आइबीएन7 को अपनी रिपोर्ट में करना चाहिए ताकि गलतफहमी दूर हो। ध्यान रहे कि आइबीएन सेवेन ने अपनी खबर में कोबरा पोस्ट के आशीष का ही नाम लिया, एक बार भी जयशंकर का नाम नहीं लिया। अब चूंकि यह विवाद का विषय बन चुका है कि इसमें जयशंकर की क्या भूमिका थी तो इसे स्पष्ट करना आइबीएन-सेवेन का ही दायित्व है। अब हमें लूट-डकैती और दुष्कर्म के रियल्टी शो देखने को मिलेंगे !
मार्केटिंग हेड से लेकर ड्राइवर तक की रिक्तियां
स्टिंग आपरेशन की झूठी क्रेडिट ली?